वेश्यावृत्ति का मूल कारण || आचार्य प्रशांत
आचार्य प्रशांत के अनुसार, वेश्यावृत्ति का मूल कारण केवल आर्थिक मजबूरी नहीं, बल्कि पुरुषों में वासना (lust), कलात्मक व बौद्धिक साथी की कमी, और अनियंत्रित देह-कामना है। यह शारीरिक और मानसिक असंतोष का परिणाम है, जहाँ पुरुष अपनी उबला हुआ आलू जैसी (अशिक्षित/नीरस) पारिवारिक स्थिति से हटकर चतुर व कला-संपन्न वेश्याओं की तलाश करते हैं।
- मूल कारण (देह-कामना): यह पुरुषों की देह-कामना को पूरा करने की जगह रही है, जो अब वासना की पूर्ति का साधन है।
- कला का केंद्र: अतीत में, वेश्यालय सिर्फ वासना के लिए नहीं, बल्कि कलाओं, जैसे मुजरा, के संरक्षण केंद्र भी रहे हैं।
- पुरुष की मानसिक अपरिपक्वता: चूँकि घर की महिलाओं को शिक्षा और कलाओं से दूर रखा गया, पुरुष बौद्धिक और कलात्मक कंपनी के लिए वैश्यालयों का रुख करते रहे हैं।
- सामाजिक कारण: आर्थिक निर्धनता, बेरोजगारी, और सामाजिक असुरक्षा भी इस अनैतिक व्यवसाय के लिए जिम्मेदार हैं, जो इसे बढ़ावा देते हैं।
आचार्य प्रशांत के अनुसार, जब तक समाज में मानसिक और बौद्धिक विकास नहीं होगा, वासनाजन्य देह-व्यापार कायम रहेगा।

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